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खजुराहो का मन्दिर |
इतिहास के गवाह प्राचीन आभूषणों पर अपना नाम लिख दें,
मोहब्बत की संगमरमरी दीवारों को पान से रंग दें,
और शिल्पकारों की कब्रों पर जाकर करें प्रश्न,
अरे तुमने क्या नक्काशी की
अजंता की गुफाओ में, खजुराहो के मंदिरों में,
कोणार्क से लेकर ताज़महल की दीवारों तक,
अरे उठो और कब्र से बाहर आओ,
और देखो
साक्षरता की निशानी,
मेरे देश के लोग कितना पढ़ गये हैं,
उनके लिए ये धरोहर जैसे सड़ गये हैं,
तुम्हारे ही शिल्प के ऊपर बना दिया है दिल
और खींच दिया है तीर का बाण,
और मन नहीं भरा तो लिख दिया अपनी प्रेमिका का नाम,
तुम्हारी कला का क्या दिया है दाम,
ये पढ़े लिखे लोग कितने अनपढ़ हो गये है,
देश की अनमोल धरोहर प्राचीन आभूषणों पर
अपने काले नाम लिख गये है,
कला और कलाकार का कितना
अपमान कर रहे हैं,
और हम, तुम, वो, ये,सरकार सब,
कितना सहन कर रहे है,
आओ हम सब जाग जाएँ,
और अपने देश की अनमोल धरोहर को बचाएँ.
और शिल्पकारों की कब्रों पर जाकर करें प्रश्न,
अरे तुमने क्या नक्काशी की
अजंता की गुफाओ में, खजुराहो के मंदिरों में,
कोणार्क से लेकर ताज़महल की दीवारों तक,
अरे उठो और कब्र से बाहर आओ,
और देखो
साक्षरता की निशानी,
मेरे देश के लोग कितना पढ़ गये हैं,
उनके लिए ये धरोहर जैसे सड़ गये हैं,
तुम्हारे ही शिल्प के ऊपर बना दिया है दिल
और खींच दिया है तीर का बाण,
और मन नहीं भरा तो लिख दिया अपनी प्रेमिका का नाम,
तुम्हारी कला का क्या दिया है दाम,
ये पढ़े लिखे लोग कितने अनपढ़ हो गये है,
देश की अनमोल धरोहर प्राचीन आभूषणों पर
अपने काले नाम लिख गये है,
कला और कलाकार का कितना
अपमान कर रहे हैं,
और हम, तुम, वो, ये,सरकार सब,
कितना सहन कर रहे है,
आओ हम सब जाग जाएँ,
और अपने देश की अनमोल धरोहर को बचाएँ.
Bahut badhiya kavita hai.
ReplyDeleteबढ़िया रचना है। बधाई।
ReplyDeleteप्रमोद ताम्बट
भोपाल
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http://vyangyalok.blogspot.com