25 साल बाद भी "चर्चा" चालू है,
भोपाल के गैस पीड़ितों के लिए,
इंसाफ, दर्द, इंसानियत, इन सबकी कोई जगह नही है,
इंसानों की लाशों पर चल रही है,
राजनीति भोपाल में,
15000 ह्ज़ार की मौत,
लाखों परेशान अब भी,
भोपाल से दिल्ली तक,
अखबारों से मीडिया तक
सबके पास "चर्चा" का अच्छा मुद्दा हैं,
लोग परेशान है, अपने दुखों से,
वे जो 1 साल के थे तब, आज 25 के हैं,
वे जो 25 के थे तब ,आज 50 के हैं
और वे जो तब 50 के थे,
अब नहीं हैं,
वे गैस की वजह से,
इंसाफ के इंतज़ार में मरते रहे
ओर जो बचे हैं,
वे भी मर जाएंगे इंसाफ के इंतजार में,
मुझे पता है,कानून अंधा है,
उसकी आंखों पर बंधी है पट्टी
किसने बाँधी ,
कोई नही जानता,
15000 की मौतों का इंसाफ
25 साल में हो न सका,
लेकिन भोपाल जिंदा है आज भी,
मीडिया में
लोग, "चर्चा" कर रहे हैं,
15000 लाशों को इधर से उधर फेंक रहे हैं ,
गेंद की तरह
दिल्ली से भोपाल के बीच,
और मैं आज भी याद करता हूँ ,
मेरे पड़ोसी शफ़ी भाई की बीबी और बच्ची की मौत,
मेरी आंखों में आज भी दर्द है,
उन सबके लिए ,
और स्टेशन मास्टर शर्मा जी के लिए
जिनकी वजह से ह्ज़ारों जानें बची ................
Showing posts with label कविता-भोपाल के गैस पीड़ितों के लिए. Show all posts
Showing posts with label कविता-भोपाल के गैस पीड़ितों के लिए. Show all posts
Friday, June 18, 2010
Subscribe to:
Posts (Atom)
