Sunday, August 8, 2010

" हवन"

हवन ही हवन में हवन हो गये
सभ्यता से मिले संस्कार ,
पता नही उनके कैसे गबन हो गये !
धर्म, एकता, अखण्डता, और शांति
बस बचे नाम के,
इनके अर्थ तो लगता है,
जैसे दफ़न हो गये,
इंसानों के बीच, इंसानियत से ही थी उम्मीद,
पर आज तो इंसान ही इंसान के क़फन हो गये,
हवन ही हवन में हवन हो गये,

1 comment:

  1. अपनी पोस्ट के प्रति मेरे भावों का समन्वय
    कल (9/8/2010) के चर्चा मंच पर देखियेगा
    और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा।
    http://charchamanch.blogspot.com

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